ज्यादा सेंट लगाने से क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Tue 13th Dec 2022 : 12:20

सावधान: ज्यादा परफ्यूम लगाने से हो सकती है कैंसर जैसी गंभीर बीमारी

गर्मियों में होने वाले पसीने और शरीर से आने वाली बदबू से बचने के लिए हम सभी तरह-तरह के ब्रॉड के परफ्यूम इस्तेमाल करते हैं। समय के साथ महिलाओं और पुरुषों के लिए बाजार में अलग-अलग परफ्यूम भी बिकने लगे हैं। इसके एक-दो स्प्रे से न सिर्फ शरीर से आने वाली बदबू चली जाती है साथ ही आपको दूसरों से मिलते वक्त शरीर की दुर्गंध के कारण शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में बिकने वाले डियो और परफ्यूम आपकी सेहत के लिए कितने नुकसानदायक हो सकते है? जानकारों का मानें तो इन परफ्यूम में कई ऐसे रसायन मिले होते हैं जो आपको कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर खुशबू देने वाले ये परफ्यूम हमारे लिए इतने खतरनाक क्यों होते हैं?

क्यों हैं इतने नुकसानदायक
विशेषज्ञों का कहना है कि परफ्यूम को बनाने और इसकी खुशबू को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए कंपनियां कई तरह के ऐसे रसायनों को प्रयोग में लाती हैं जिनके संपर्क में आने तक से हमें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। इन परफ्यूमों और डियो में कई तरह के ऐसे सिंथेटिकों को भी मिलाया जाता है जो त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचा सकती हैं। अब सोचिए जिस परफ्यूम को आप दिन में दो से चार बार प्रयोग में ला रहे हैं उससे आपको कितना नुकसान हो रहा है।

क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों से हार्मोनल असंतुलन और स्किन एलर्जी होना सामान्य है। त्वचा से इन रसायनों के संपर्क होते ही आपको भी जलन महसूस होती होगी। कुछ रसायन इतने खतरनाक होते हैं जिनके कारण आपको त्वचा पर चकत्ते, बांझपन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
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किन रसायनों का होता है सबसे ज्यादा प्रयोग
जानकारों की मानें तो परफ्यूमों में फ्थेलेट्स, मस्क कीटोन और फॉर्मलडिहाइड जैसे रसायनों को प्रयोग में लाया जाता है। फ्थेलेट्स के उपयोग को कई देशों ने बैन कर रखा है। इससे ध्यान लगाने में परेशानी, मस्तिष्क के विकास संबंधी दिक्कतों के साथ तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियां होने का डर रहता है। इसके अलावा मस्क कीटोन ऊतकों और ब्रेस्ट मिल्क में आसानी से घुल जाता है जिससे नवजात को कई प्रकार की बीमारियां होने का खतरा रहता है।

ब्रेस्ट कैंसर प्रीवेंशन पार्टनर्स (बीसीपीपी) के पॉलीसी डायरेक्टर जेनेट न्यूडेलमैन ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि इस तरह के उत्पादों में कम से कम 4000 तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है लेकिन आप इन्हें परफ्यूम के बॉटल पर अंकित नहीं पाएंगे। कंपनियां लोगों से इन्हें छिपाकर रखती हैं।

इससे पहले साल 2018 की में बीपीसीसी ने एक अध्ययन के दौरान सुगंध देने वाले ऐसे ही 140 उत्पादों का परीक्षण किया था। इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि इन उत्पादों का तीन-चौथाई हिस्सा विषाक्त रसायनों से युक्त होता है। इन सभी रसायनों को क्रोनिक स्वास्थ्य स्थितियों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारक पाया गया।

महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा
जेनेट न्यूडेलमैन के मुताबिक वैसे तो सभी लोगों को इस तरह के उत्पादों से होने वाली समस्याओं को लेकर अवगत कराया जाता है, लेकिन देखने को मिलता है कि महिलाओं को इन उत्पादों के साइड इफेक्ट्स ज्यादा झेलने पड़ते हैं। इसका मुख्य कराण उनको तरह तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करना होता है। औसत अमेरिकी महिला एक दिन में 12-16 उत्पादों का उपयोग करती है, जिनमें से कई में हानिकारक रसायनों का प्रयोग होता है।

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